बाल शाहिद प्रजापति रामचन्द्र विद्यार्थी

बाल शाहिद प्रजापति रामचन्द्र विद्यार्थी

ने 14 अगस्त 1942 को ही देवरिया
कचहरी पर तिरंगा फहरा दिया था। उसी समय
वह साथियों संग अंग्रेजों की गोली के शिकार
भी हो गए थे। नगर पालिका ने वर्ष 1958 में      

उनकी याद में रामलीला मैदान के पास स्मृति-
स्तंभ बनवाया है। महात्मा गांधी ने नौ अगस्त
1942 को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ ’अंग्रेजों
भारत छोड़ो’ आंदोलन का ऐलान किया था।
देसही देवरिया क्षेत्र के हथियागढ़ के रहने वाले
रामचंद्र विद्यार्थी इस आंदोलन मे कूद पड़े थे। 14
अगस्त को वह साथियों संग देवरिया कचहरी
पहुंच गए।
उन्होंने अंग्रेजों का झंडा फाड़ दिया और यहीं
तिरंगा लहरा दिया। अंग्रेजी हुकूमत के परगना
अधिकारी उमाराव सिंह ने गोली चलाने का
आदेश दे दिया। अंग्रेजों की गोली से रामचंद्र
विद्यार्थी के अलावा इसी क्षेत्र के
सोहदरापट्टी के सोना उर्फ शिवराज सोनार,
पैकौली गांव के बंधू उर्फ धिन्हू और कतरारी के
गोपी मिश्र शहीद हो गए थे। आजादी मिलने के
11 वर्ष बाद 1958 में नगर पालिका ने रामलीला
मैदान स्मृति-स्तंभ बनवाया। 25 मई को उत्तर
प्रदेश सरकार के तत्कालीन शिक्षा, गृह और
सूचना विभाग मंत्री कमलापति त्रिपाठी ने
स्मारक का उद्घाटन किया। 26 जनवरी 1988
को नगर पालिका अध्यक्ष रामाशंकर प्रसाद
उर्फ रामा बाबू ने इसका जीर्णोद्धार
कराया। संगमरमर से स्मृति-स्तंभ का निर्माण
कराया गया है।
इसके चारो ओर चाहरदीवारी बनवाई गई है।
चाहरदीवारी के अंदर ही अशोक के पेड़ लगवाए

गए हैं।